समोसा बनाने वाले के बेटे को एडवांस्ड जे.इ.इ में 64 वां स्थान मिला और अब वह आई. आई. टी मुंबई में है

जब आप लोगों की मुश्किलों को पार करने वाली और जिंदगी में असंभव को छूनेवाली कहानियां सुनते हैं, तब आपको यह एहसास होता है कि अगर आप संकल्पित रहते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं, और अपने आप में विश्वास करते हैं, तो आपके लक्ष्य और सपने आपकी पहुँच में  होते हैं. हैदराबाद के इस युवा की यह कहानी भी उन्हीं में से एक है.

हर रोज, 17 वर्षीय वाबिलिसेटी मोहन अभ्यास अपनी मां को मसालेदार-गर्म ईरानी समोसे बनाने में मदद करता था जिन्हें उसके पिता बाहर ले जाकर सड़कों पर बेच सकें. ऐसा कुछ दिन पहले तक होता था. आज, उसका भविष्य एक अलग ही कहानी पेश कर रहा है. ऐसा है कि, अभ्यास को अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जे.ई.ई में 64 वां स्थान पाने के बाद, प्रतिष्ठित आई.आई.टी. मुंबई में दाखिला मिल गया है.

वह अपने आदर्श, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तरह एक वैज्ञानिक बनना चाहता है

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अपने स्कूल और जूनियर कॉलेज से अनुमति लेकर, स्कूल समाप्त होने के बाद भी अभ्यास हर रोज 10 घंटे स्कूल में रुककर पढ़ता था. तो ऐसा क्या था जिसने इस युवा को अपने आदर्श की तरह वैज्ञानिक बनने के लिए प्रेरित किया?

उसने एक इंटरव्यू में कहा, “मैं भविष्य में एक वैज्ञानिक बनना चाहता हूं और अपने माता-पिता को बसने और उन्हें खुश रखने में मदद करना चाहता हूँ.”

अभ्यास के परिवार की सालाना आय एक लाख रुपये की भी नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता के लिए उनके बेटे की शिक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी.

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अभ्यास मुख्य परीक्षा में 64 वें स्थान पर आया, जिससे प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक में उसका स्थान सुनिश्चित हो गया. आंध्र प्रदेश इंजीनियरिंग कृषि और मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में भी उसने शीर्ष स्थान हासिल किया और इंजीनियरिंग और मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए राज्य के कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में पांचवें स्थान पर रहा.

उसकी माँ, सूर्यकला ने कहा कि उसने अपने बेटे को हमेशा अपनी पसंद के अनुसार निर्णय लेने की अनुमति दी है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि “मैं उसे कहती थी कि वह बहुत अधिक पढाई न करे. मैंने उसे कभी नहीं कहा कि उसे कुछ हासिल करना चाहिए.”

और आज अभ्यास ने आई.आई.टी मुंबई को चुना है!

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