20,000 से ज़्यादा बच्चों को मानव तस्करी से बचाकर रंगु सौरिया बनीं बहादुरी की मिसाल!

“पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और फिर आप जीत जाते है.” महात्मा गाँधी द्वारा कहे गए यह शब्द रंगु सौरिया की मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं. उन्होंने 18 साल से कम आयु की लगभग 500 से भी अधिक लड़कियों को बचाया है. इन लड़कियों को सिक्किम, उत्तरी बंगाल, नेपाल और असम से लाकर बंधुआ मजदूर बना दिया जाता है या फ़िर देह व्यापार में धकेल दिया जाता है.

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रंगु सौरिया उत्तरी बंगाल की दार्जीलिंग की पहाड़ियों में स्थित पनिघट्टा की रहने वाली हैं. उनके जीवन का उद्देश्य मानव तस्करी के अमानवीय कृत्य को जड़ से ख़त्म कर देना है. वह सिलीगुड़ी स्थित गैर सरकारी संगठन (NGO) “कंचनजुंगा उद्धार केंद्र” के साथ जुडी हुई हैं. उनके निष्कर्षों के मुताबिक़ उन्होंने जिन लड़कियों को बचाया है उनमें से ज़्यादातर असम, सिक्किम, और उत्तरी बंगाल और नेपाल की रहने वाली हैं और इन्हें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पटना जैसे बड़े शहरों में बेच दिया जाता है.

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रंगु का जीवन आसान नहीं है, और वह बताती हैं कि “मुझे बहुत बार गुंडों और माफिया से धमकी मिली है और यहाँ तक कि मुझे बड़ी रकम का लालच भी दिया गया लेकिन मेरा उद्देश्य इन महिलाओं को इनके बंधन से मुक्त करवाना है.”

रंगु ने 2004 में मानव तस्करी के चंगुल में फंसी लड़कियों को बचाने की पहल की थी. जब उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर दिल्ली स्थित एक व्यवसायी द्वारा बंधुआ मजदूर बनाकर रखी गई एक 13 वर्षीय लड़की को बचाया था, तो उनका जीवन के प्रति नज़रिया ही बदल गया. तब से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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उन्होंने आज तक 20,000 से अधिक बच्चों और लड़कियों को नेपाल सीमा पर और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से तस्करी किए जाने से बचाया है. उनके द्वारा किए गए अच्छे कामों के लिए उन्हें 2011 में “गोडफ्रे फिलिप्स सोशियल ब्रेवरी अवार्ड” (Godfrey Phillips Social Bravery Award) और 2009 में भारतीय वाणिज्य और उधोग महासंघ से “वीमेन अचीवर अवार्ड” (Women Achiever’s Award) से सम्मानित किया गया था. 2016 में उन्हें 100 भारतीय प्रतिष्ठित महिलाओं में से एक होने के कारण राष्ट्रपति द्वारा भी पुरस्कृत किया गया था.

हम आशा करते हैं कि वह अपने इस अच्छे कार्य को जारी रखेंगी और मानवता के खिलाफ इस तरह के घिनौने अपराधों के शिकार लोगों के लिए आशा की किरण बनी रहेंगी.

 

 

 

 

 

 

 

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