सूखा-पीड़ित गाँव में 101 पेड़ लगाकर पुणे के इस जोड़े ने अपने बच्चे के नामकरण को यादगार बना डाला!

भारत में बच्चे का नामकरण एक महत्वपूर्ण और खुशियों से भरा समारोह होता है| बच्चे के जन्म के साथ ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है और कभी-कभी इसे बहुत भव्य ढंग से भी मनाया जाता है|

हालांकि नायक परिवार इसे बड़े पारिवारिक समारोह की तरह या भव्य समारोह की तरह नहीं मनाना चाहते थे, बल्कि उन्होंने अपने जीवन के इन पलों को यादगार बनाने के लिए 101 पेड़ लगाने का निर्णय लिया|

Credit: Flickr | J.Kelley (representational image)

रणजीत और नेहा नायक पुणे में रहते हैं और बहुत समय से उनकी इच्छा थी कि प्रकृति द्वारा दी गई देन के लिए धन्यवाद स्वरुप वे प्रकृति के लिए कुछ करें| उनकी बेटी का जन्म उनके लिए यवत में स्थित भूलेश्वर मंदिर के निकट माल्शिरस गांव के निवासियों की मदद करने का एक अवसर था, जो बहुत लम्बे समय से सूखे की मार झेल रहे हैं|

इस दंपत्ति ने अपने मित्रों और परिवार को भी अपनी इस पहल के बारे में बताने का निर्णय लिया|इस समूह ने माल्शिरस गांव के बाहर जाकर नीम, आम, चीकू, बांस, नारियल, ताड़, गुलमोहर, बरगद, जाम बेर, पवित्र अंजीर, इमली, आदि के बीज लगाए। उन्होंने स्थानीय विद्यालय के छात्रों को 51 से अधिक पौधे दान किए| इस छोटे से प्रयावरण अभियान की कुल लागत लगभग ₹50,000 थी| इसके अलावा इन लगाए गए पेड़ों की पशुओं और कीटों से सुरक्षा के लिए इस  दंपत्ति ने इस पूरे क्षेत्र के चारों ओर लकड़ी के डंडों और जाल से बाड़ बना दी|

Credit: Times of India

इस जोड़े ने अपने बच्चे के नाम के साथ एक केक को काटने से इस दिन की समाप्ति की और इन पेड़ों की देखभाल के लिए सप्ताह में एक बार गांव में वापस आने का वचन दिया| उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि इन पौधों का ध्यान रखा जाए।

स्थानीय ग्रामीण इस घटना से बहुत उत्साहित हुए और इस क्षेत्र के स्थानीय अध्यक्ष अरुण यादव ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “लोग बहुत कम ही हमारे गांव में आते हैं, लेकिन आज ये लोग दिल को छू लेने वाले विचार के साथ आए| हमने कई वर्षों से पानी की कमी देखी है, और इस कमी के कारण हम हमारी कृषि भूमि का पूरी तरह उपयोग नहीं कर पा रहे हैं| हमारे आसपास के क्षेत्रों में अंधाधुंध वृक्ष काटने की घटनाएं भी होती रहती हैं| बागवानी एक ऐसी गतिविधि है जो हमारे दिमाग में कुछ समय से थी लेकिन इन लोगों से इतनी दूर से हमारे गाँव में आकर यह कार्य कर दिखाया और सब लोगों को अपने इस कार्य के माध्यम से एक ख़ूबसूरत संदेश दिया|”

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